E-mail subscription

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

Sunday, 15 March 2020

युवा पीढ़ी को स्वामी जी का संदेश ( Swamiji's message to the younger generation) part 1

*इस देश का पुनरुत्थान युवाओं*               *द्वारा होगा।*

नवयुवको, तुम्हारे ऊपर ही मेरी आशा है । क्या तुम अपनी जाति और राष्ट्र की पुकार सुनोगे ? यदि तुम्हें मुझ पर विश्वास है तो मैं कहूंगा कि तुम में से प्रत्येक का भविष्य उज्जवल है । मेरा विश्वास युवा पीढ़ी में , नयी पीढ़ी में है, मेरे कार्यकर्ता उसमें से आएंगे । सिंहों की भांति वे समस्त समस्या का हल निकालेंगे । मैंने अपना आदर्श निर्धारित कर लिया है और उसके लिए अपना समस्त जीवन दे दिया है। यदि मुझे सफलता नहीं मिलती तो मेरे बाद कोई अधिक उपयुक्त व्यक्ति आएगा और इस काम को संभालेगा , और मैं अपना संतोष प्रयत्न करने में ही मानूंगा !
चरित्रवान , बुद्धिमान , दूसरों के लिए सर्वस्व त्यागी तथा आज्ञाकारी युवकों (युवा पीढ़ी) पर ही मेरे भविष्य का कार्य निर्भर है । उन्हीं पर मुझे भरोसा है, जो मेरे भावों को जीवन में परिणत कर अपना और देश का कल्याण करने में जीवनदान कर सकेंगे ।

*एक आदर्श अपनाओ*


एरा भविष्य निश्चित करने का सही समय है। इसीलिए मैं कहता हूं कि अभी इस भरी जवानी में, इस नये  जोश के जमाने में ही काम करो , जीर्ण शिर्ण हो जाने पर काम नहीं होगा । काम करो, क्योंकि काम करने का सही समय है । सबसे अधिक ताजे , बिना स्पर्श किए हुए वह बिना  सुंघे फूल ही भगवान के चरणों पर चढ़ाए जाते हैं और वे उसे ही ग्रहण करते हैं । अपने पैरों पर खड़े हो जाओ , देर न करो , क्योंकि जीवन क्षणस्थायी है।....... अपनी जाति, देश, राष्ट्र और समग्र मानव समाज के कल्याण के लिए आत्मोत्सर्ग करना सीखो ।...... आओ , हम अपने आगे एक महान आदर्श खड़ा करें और उसके लिए अपना जीवन उत्सर्ग कर दें ।

*आत्मनिर्भरता *


तेरे भीतर अदम्य शक्ति है । तू तो 'मैं कुछ नहीं' सोच कर वीर्यविहीन बना जा रहा है।...... आगे बढ़ो! सैकड़ों युगों के उद्यम से चरित्र का गठन होता है । निराश ना होओ । सत्य के एक शब्द का भी लोप  नहीं हो सकता । यदि दीर्घकाल तक कूड़े के नीचे भले ही दबा पड़ा रहे, परंतु देर  या सवेर वह प्रकट होगा ही । सत्य  अनश्वर है , पुण्य अनश्वर है। पवित्रता  अनश्वर हैं। मुझे सच्चे मनुष्य की आवश्यकता है , मुझे शंख - ढ़पोर चेले नहीं चाहिए। मेरे बच्चे, दृढ़ रहो । कोई आकर तुम्हारी सहायता करेगा , इसका भरोसा ना करो।..... आत्मनिर्भर बनो ।
पहले अपने में अंतर्निहित आग में शक्ति को जागृत कर , फिर देश के समस्त व्यक्तियों में जितना संभव हो, उस शक्ति के प्रति विश्वास जगाओ।

*आत्मविशवास *


इच्छाशक्ति संसार में सबसे अधिक बलवती है। उसके सामने दुनिया की कोई चीज नहीं ठहर सकती । क्योंकि वह भगवान - साक्षात भगवान से आती है। विशुद्ध दृढ़ इच्छाशक्ति सर्वशक्तिमान है। क्या तुम इसमें विश्वास नहीं करते ?
आज हम जो चाहते हैं , वह हैं - बल , अपने में अटूट विश्वास। हमें पुनः एक बात सच्ची श्रद्धा को जगाना होगा, तभी आज देश के सामने जो समस्याएं हैं, उनका समाधान स्वयं हमारे द्वारा हो सकेगा ।
शक्ति क्या कोई दूसरा देता है? वह तेरे भीतर ही मौजूद है । समय आने पर वह स्वयं ही प्रकट होगी। तो काम में लग जा, फिर देखेगा , इतनी शक्ति आएगी कि तू उसे संभाल न सकेगा। दूसरों के लिए रत्ती भर काम करने से भीतर की शक्ति जाग उठती है। दूसरों के लिए रत्ती भर सोचने से धीरे-धीरे ह्रदय में सिंह सा बल आ जाता है। तुम लोगों से में इतना स्नेह करता हूं परंतु तुम लोग दूसरों के लिए परिश्रम करते - करते मर भी जाओ तो भी यह देखकर मुझे प्रशंसा ही होगी।
हमारे देश के लिए इस समय आवश्यकता है , लोहे की तरह ठोस मांसपेशियों और मजबूत स्नायुवाले शरीरों की । आवश्यकता है इस तरह के दृढ़ इच्छाशक्ति संपन्न होने की कि कोई उसका प्रतिरोध करने में समर्थ ना हो । ........हमें जो चाहिए वह है शक्ति। इसलिए स्वयं पर विश्वास रखो । अपनी नसों को ताकतवर बनाओ । हमें चाहिए लोहे की मांसपेशियां और स्टील की नसें। हम बहुत रो लिए, अब और नहीं । अपने पैरों पर दृढ़ता से खड़े हो जाओ और और मनुष्य बनो ।........... कोई कुछ भी कहे, अपने विश्वास में दृढ़ रहो - दुनिया तुम्हारे पैरों तले आ जाएगी । अपने आप पर विश्वास करो, सब शक्ति तुम मैं हैं , इसे जान लो प्रकट करो ।

No comments:

Post a Comment