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Monday, 29 June 2020

मगरमच्छो के साथ बॉलीवुड के तालाब में रहने के तरीके ( चेतन भगत)

एक सफल और युवा फिल्म सितारे सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। सोशल मीडिया, टीवी चैनल, वॉट्सएप विभिन्न अनुमानों से भरे पड़े हैं। तथ्य यह की हम नहीं जानते क्या हुआ । ऐसी स्थिती में किसी पर आरोप लगाना या अनुमान लगाना समझदारी नहीं है। हालांकि, इस घटना से बॉलीवुड की संस्कृति पर और मानसिक सेहत पर इसके असर को लेकर बहस शुरू हो गई है । यह समस्या ना सिर्फ बॉलीवुड में , बल्कि किसी भी अति - प्रतिस्पर्धी इंडस्ट्री में आ सकती हैं। मुझे इस शानदार लेकिन दोषपूर्ण इंडस्ट्री में दस साल से ज्यादा का अनुभव है। यहां मैं कुछ टिप्स दे रहा हूं कि अती - प्रतिस्पर्धी यानी होड़भरे माहौल का सामना कैसे करें:-


1. बॉलीवुड में कोई सीईओ नहीं है और हर कोई यहां बने रहने के लिए संघर्ष कर रहा है । कई लोगो को लगता है कि कोई बॉलीवुड कंपनी है। और इसमें काम करना यूनिलीवर में काम करने जैसा है । ऐसा नहीं है। यहां सिर्फ कुछ शक्तिशाली लोग है, जिनका कुछ समय के लिए बोलबाला रहता है। यह पूंजी और हुनर के साथ लाकर फिल्म प्रोजेक्ट तैयार करने की उनकी क्षमता से आता है। पिछली उपलब्धियों से  ये प्रभाव बनाती हैं । लेकिन प्रभाव अस्थिर है । हिट इसे बड़ा देता हैं  और फ्लॉप से यह गायब ही सकता है । बने रहने के लिए जीतते रहना जरूरी है ।

2. यह मूलतः असुरक्षित पेशा है । सितारे खो जाते हैं,  निर्देशकों का जादू खत्म हो जाता है, अच्छी सूरत हमेशा नहीं रहती, दर्शकों की पसंद अस्थिर है, बहुत से लोग आप की जगह लेना चाहते हैं ।

3. असुरक्षा कम करने के लिए लोग गुट या कैंप बनाते हैं। अभिनेता, निर्देशक और निर्माता साथ आकर सुनिश्चित करते हैं कि उन्हें भविष्य में काम मिलता रहे। तथाकथित पार्टियां कैंप के मिलने का बहाना होती है।  वहां भी असुरक्षा की भावना है। बस वहां थोड़ा सुरक्षित महसूस होता है । यह ऐसा है जैसे केंचुए गुच्चा बनाकर खुद को मजबूत दिखाते हैं । लोगों ने कैंप में रहकर या बाहर भी अच्छा काम किया है। यह उनकी अपनी मर्जी रही है ।

4. आप सफल है ( हिट देते है ) , तो इंडस्ट्री इतना प्यार व खुशामत करेगी कि जिसकी आप कल्पना नहीं कर सकते । असफल ( फ्लॉप देते है ) है, तो अछूत हो जाएंगे ।

5. सफलता का नशा इतना ज्यादा होता है कि लोग इसकी तुलना ड्रग्स से करते हैं । हालांकि फ्लॉप और अकेलेपन का दर्द भी इतना ही ज्यादा होता है ।

6. सफलता - असफलता के ये उतार - चढ़ाव मानसिक सेहत पर बुरा असर डालते हैं। हुनर ( अभिनय/ लेखन /निर्देशन ) के अलावा आपको बहुत सारी मानसिक ताकत की भी जरूरत है । सिक्स - पैक बॉडी के साथ सिक्स - पैक मन भी हो अगर आप पहले ही बीमार हैं या कोई मानसिक समस्या रह चुकी हैं तो यह खतरनाक कोकटेल बन सकता है ।

7. एक व्यक्ति के रूप में यह इस पर निर्भर करता है कि आप खुद को को कैसे देखते हैं। अगर खुद पर भरोसा है, तो आपको पार्टी में न्योतो या कुछ लोगों के लगातार कॉल्स की जरूरत नहीं है । यह भी अहसास होना चाहिए कि जीवन अन्यायपूर्ण है, लेकिन यह कभी आपके लिए अन्यायपूर्ण रूप से अच्छा हो सकता है, तो बुरा भी। बॉलीवुड के साथ भी ऐसा ही है । व्यक्ति को खुद में और अपने सफ़र में ही खुश है ना होता है, फिर वह कितना भी शानदार या साधारण हो ।

8. आप मानसिक  रूप से कितने ही मजबूत क्यों ना हो, अगर बॉलीवुड के तालाब (इस पर आगे बात करूंगा) मैं पूरी तरह उतरते हैं तो आप जोखिम में है। यह काम में डूबे गैर - बॉलीवुड लोगों पर भी लागू होता है, जो अति - प्रतिस्पर्धी इंडस्ट्री में काम करते हैं। जीवन में विविधता लाना सीखे । आपको अपना काम पसंद होगा, लेकिन यह सुनिश्चित करें कि आपके जीवन में सिर्फ काम ही ना हो । स्वास्थ्य, परिवार, शौक, पुराने दोस्त, इन सब में शायद ग्लैमर और बॉलीवुड की खूबसूरती कम हो, हालांकि वे आपको सुकून और जिंदगी में खुशी दे सकते हैं ।

9. बॉलीवुड में कैसे रहा जाए, इसे लेकर मुझे सबसे अच्छी सलाह एअार रहमान से मिली थी , जिनसे मुझे मिलने का सौभाग्य मिला था। मैने उनसे कहा कि बॉलीवुड मुझे डरा रहा है, तो उन्होंने कहा ,  'बॉलीवुड सुंदर तालाब जैसा है । हालांकि इसमें मगरमच्छ है । इसलिए एक कोने में खड़े होकर नहाना ठीक है। इसमें पूरी तरह तैरो मत । हमेशा एक पैर अंदर , एक पैर बाहर रखो।'
मैंने फिल्म इंडस्ट्री में रहने के लिए उस्ताद की सलाह को मंत्र की तरह माना ।  यह आसान नहीं है। बॉलीवुड की चमक तेज लग सकती है और आसुस के सामने  सब तुच्छ । मानसिक सेहत के कारणों से ही मैंने तय किया कि मैं सभी अंडे एक टोकरी में ही मैं नहीं रखूंगा, चाहे टोकरी सबसे चमकदार हो । मैं दूसरे काम भी करता हूं ( इसलिए आप यह कॉलम पढ़ रहे हैं ) और मैं मगरमच्छों का शुक्रगुजार हूं कि वह मुझ तक नहीं पहुंचे । मैं होड़ वाले पेशो में काम कर रहे बाकी सभी को भी प्रोत्साहित करूंगा कि वह इसके कारण होने वाली मानसिक समस्याओं के प्रति जागरूक रहें। उन पर ध्यान दें और अपने जीवन में विविधता लाएं । कोई भी ग्लैमरस पार्टी या नौकरी में सफलता आपकी अंदरूनी खुशी से बढ़कर नहीं है ।
                   ( ये लेखक के अपने विचार हैं।)

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संबंधी आर्टिकल्स:-
1. हमारा परबंधन कैसा हो ?
2. सब निशुल्क है।
3. इश्क और कॉरॉना ।
4. रेल चली है।


Monday, 22 June 2020

हमारा प्रबंधन कैसा हो ?(How should we manage?)

1. संवाद

यह ध्यान रखें लोग आपकी बात पर कब गौर करते हैं?


बेंजामिन फ्रैंकलिन अपनी आत्मकथा में बताते हैं कि उन्होंने अपने व्यक्तित्व और दूसरे पर अपने प्रभाव को कैसे बदला। ऐसा तब हुआ जब वे लोगों को राय देने से पहले बोलते 'मुझे ऐसा लगता है कि...' या 'कुछ लोग कहते हैं कि...'। अगर आप अपने विचारों को हल्के से व्यक्त करते हैं और यह संकेत देते हैं कि आप गलत भी हो सकते हैं, तो आप की बात सुनना और आपके विचारों को महत्व देना लोगों के लिए ज्यादा आसान हो जाएगा। यदि आप स्पष्ट करते हैं कि आप दूसरों के विचारों और विश्लेषणों के प्रति खुला नजरिया रखते हैं तो लोग आपके प्रति भी ज्यादा खुलेंगे।
• द ऑटोबायोग्राफी ऑफ बेंजामिन फ्रैंकलिन से


2. सफलता

'मेरी पसंदीदा छुट्टी की जगह... सिर्फ और सिर्फ मेरा घर है '


' जो नाम , शोहरत और पैसा ओलंपिक पदक के साथ आया, वह मेरी और मेरे परिवार की कल्पनाओं से परे की बात है । मेरे कार्यक्रमो का उत्साहित करने वाला हिस्सा छात्रों के साथ उन्हें प्रेरित करने वाली बातचीत करना था । मेरी जिंदगी का दूसरा नया अनुभव फोटो खिंचवाने के सत्रो का था। चकाचौंध के साथ जो यात्राएं जुड़ी थी, वो उबाऊ थीं। मेरे दोस्त कहते है ' तुम थक गई होगी, तुम्हे छुट्टी पर जाना चाहिए ।' सच यह है की मेरी जगह मेरा घर है। वह मामूली है लेकिन उसके अलावा कोई जगह नहीं जहां मैं होना चाहती हूं।'
• एम्.सी. मैरी कॉम


3. जीवन

शरीर में सुधार कर सकते हैं तो आंतरिक मन में क्यों नहीं ?


जब महात्मा गांधी से कहा गया कि वह असाधारण पुरुष है तो उन्होंने जवाब दिया - 'कितना विचित्र है हम लोगों का यह सोचना कि शरीर में तो सुधार किया जा सकता है, पर आत्मा की सुप्त शक्तियों को जगाना असंभव है। मुझमें न कोई असाधारणता कभी थी और ना अभी है। मै एक साधारण व्यक्ति हूं जो अन्य किसी मानव की भांति भूल कर सकता है। अपनी भूल मान लेने की विनम्रता मुझ में है। मैं यह भी स्वीकार करता हूं कि ईश्वर पर मेरा अटल विश्वास है। परंतु क्या यही सब प्रत्येक मनुष्य में सुप्त अवस्था में नहीं है ?
• योगी कथामृत


4. विचार

विचार तभी परिपक्व होते हैं जब उनकी सही देखभाल हो 


विचार जब पैदा होते हैं तभी से उनकी खास देखभाल होनी चाहिए और तब तक होनी चाहिए जब तक कि वह बड़े ना हो जाए। विचारों को बच निकलने का मौका ना दें । उन्हें लिख ले। हर दिन आपके दिमाग में बहुत से अच्छे विचार आते हैं परंतु वे जल्दी मर भी जाते हैं क्योंकि आपने उन्हें कागज पर नहीं लिखा है और आप कुछ समय बाद में भूल जाते हैं। नए विचारों की पहरेदारी करने के लिए नोटबुक रखें। अपने विचारों का अवलोकन भी करें। आपको कुछ विचार बेकार या महत्वहीन लगेंगे उन्हें बाहर कर दें और जो विचार दमदार लगे उन्हें विकसित करें ।
• योगी कथामृत


Sunday, 21 June 2020

सब नी:शुल्क है।

एक व्यंग हैं पसंद आये तो एक स्माइल दीजियेगा।

💮यह नदियों का मुल्क है,
पानी भी भरपूर है।
बोतल में बिकता है,
पन्द्रह रू शुल्क है।

💮यह गरीबों का मुल्क है,
जनसंख्या भी भरपूर है।
परिवार नियोजन मानते नहीं,
नसबन्दी नि:शुल्क है।
:
💮यह अजीब मुल्क है,
निर्बलों पर हर शुल्क है
अगर आप हों बाहुबली,
हर सुविधा नि:शुल्क है।
:
💮यह अपना ही मुल्क है,
कर कुछ सकते नहीं।
कह कुछ सकते नहीं,
बोलना नि:शुल्क है।
:
💮यह शादियों का मुल्क है,
दान दहेज भी खूब हैं।
शादी करने को पैसा नहीं,
कोर्ट मैरिज नि:शुल्क हैं।💮
:
💮यह पर्यटन का मुल्क है,
रेलें भी खूब हैं।
बिना टिकट पकड़े गए तो,
रोटी कपड़ा नि:शुल्क है।💮
:
💮यह अजीब मुल्क है,
हर जरूरत पर शुल्क है।
ढूंढ कर देते हैं लोग,
सलाह नि:शुल्क है।💮
:
💮यह आवाम का मुल्क है,
रहकर चुनने का हक है।
वोट देने जाते नहीं,
मतदान नि:शुल्क है।💮

💮यह शिक्षकों का मुल्क है,
पाठशालाएं भी खूब है,
शिक्षकों को वेतनमान देने के पैसे नहीं,
पढ़ना,खाना,पोशाक निःशुल्क है।💮

: बेचारा आदमी:
जब सर के बाल न आये तो दवाई ढूँढता है..,
जब आ जाते है तो नाई ढूँढता है..,
जब सफ़ेद हो जाते है तो डाई ढूँढता है...!
और जब काले रहते हैं तो लुगाई ढूँढता है

          🙏मुस्कुराईये निशुल्क है🙏


Friday, 19 June 2020

रेल चली हैं। ( The train has run. )



छुक छुक करती रेल चली
सरगम भरती रेल चली।
उत्तर से दक्षिण को जाती
पूरब - पश्चिम जाती - आती ।

रुकने का तो नाम नहीं है
थकने का भी काम नहीं है ।
चलती है, बस चलती जाती
सबको यहां वहां पहुंचाती ।

मिलते कितने दृश्य सुहाने
लगे देखकर मन ललचाने
दूर-दूर तक हरियाली है
खुशहाली - ही - खुशहाली है ।


पर्वत - घाटी, नदिया - नालें
नैहरे कहीं, कहीं है खाले।
मगर कहीं पर धरती प्यासी
कहीं हताशा, कहीं उदासी ।

देश देश के लोग मिलेंगे
वेश - वेश में लोग मिलेंगे।
सबकी अपनी भाषा - बोली
मिलकर करते हंसी - ठिठोली ।

अपनी - अपनी मंजिल सबकी
अपनी - अपनी महफिल सबकी।
जीवन के सब रंग अलग है
भोजन के सब ढंग अलग हैं ।


कोई खाए इडली - डोसा।
कोई चाहे चाट - समोसा
कोई रोटी - चावल खाता।
कुछ को दही- पराठा भाता।

जनता, नेता, वर्दीधारी
सभी रेल की करे सवारी।
बड़े अनूठे खेल रेल के
जोड़ रही है तालमेल के

खान-पान या चना - चबेना
किसी और से कभी ना लेना।
सब को देखो , सब को जानो
कहना सदा बड़ों का मानो ।

सीखो सब - कुछ खेल - खेल में
टिकट खरीदो, चढ़ो रेल में ।
टीटी आए टिकट दिखाना
नियम यही सब को समझाना।

रेल सभी को ढ़ोती बच्चों
रेल सभी की होती बच्चों ।
रखो इसमें सदा सफाई
अच्छी बात यही है भाई ।

दुनिया यूं ही चलती जाती
रेल यही हमको समझाती।
प्रेम भाव के साथ निभाओ
जब तक जीवन चलते जाओ ।

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।।जय हिन्द जय भारत।।