स्वामी विवेकानंद कहते हैं - "कभी भी दूसरों की कमियों के विषय में बात मत करो । वे कितने भी बुरे हो , इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, इससे कुछ हासिल होने वाला नहीं है । तुम किसी के दोष गिनाकर उसकी मदद नहीं कर सकते , तुम उसे भी चोट पहुंचाते हो और साथ ही स्वयं को भी।" इसलिए इसे ठीक से समझ कर अपनाना है -
दूसरों को दोष मत दो। अपनी असफलता के लिए दूसरों को दोष देना, एक सामान्य मानवीय प्रवृत्ति है ।
विवेकानंद कहते हैं - "मैं दृढ़तापूर्वक विश्वास दिलाना चाहता हूं कि कोई भी व्यक्ति दूसरों को गाली देने से कभी आगे नहीं बढ़ सकता, वरण वह प्रशंसा करके उन्नति प्राप्त कर सकता है । यही राष्ट्रों पर भी लागू होता है । स्वामी विवेकानंद का यह सूत्र - "अपनी गलतियों के लिए दूसरों को दोष मत दो , अपने पैरों पर खड़े हो जाओ, सारी जिम्मेदारी अपने ऊपर ले लो।"
दोषारोपण का नकारात्मक व्यवहार , आत्म निरीक्षण करने और असफलताओं के प्रति सुधारात्मक कदम बढ़ाने से रोकता है । स्वयं या अपने मित्रों की सहायता से जीवन नौका के उन हानिकारक छिद्रों को ढूंढ कर उन्हें बंद कर सके ताकि असफलताओं के सागर में डूबने से बच सकें। नकारात्मक ऊर्जा कभी भी उन्नति की ओर नहीं ले जा सकती हैं, वह पतन की ओर धकेलती है । ध्येय प्राप्ति का मार्ग हमेशा सकारात्मक सोच से ही आगे बढ़ता है ।
स्वामी विवेकानंद जी ने कहा है - "असफलताओं की चिंता मत करो, वह बिलकुल स्वाभाविक है, वे असफलताएं जीवन का सौंदर्य है । जीवन में यदि संघर्ष ने रहे तो मनुष्य जीवन व्यर्थ है। संघर्ष, त्रुटियों और असफलताओ की परवाह मत करो, यह छोटी-छोटी फिसलने है। अपने आप पर विश्वास का आदर्श सामने रखकर सदैव आगे बढ़ने का प्रयास करो । यदि एक हजार बार भी असफल होते हो , तो एक बार फिर सफल होने के लिए प्रयत्न करो ।"
9. स्वाभिमानी बनो
जीवन में आगे बढ़ना है , लक्ष्य को प्राप्त करना है तो इसे भी याद रखना होगा। 'स्वाभिमानी बनो'। अपने स्वाभिमान को हर प्रकार से बनाए रखना है। विनम्रता चरित्र का एक उत्तम गुण हैं, किंतु आत्म सम्मान की कीमत पर नहीं। सर्वप्रथम आत्म सम्मान ही होना चाहिए, फिर विनम्रता, आदर और अन्य सभी चारित्रिक गुण व्यवहार में आने चाहिए। आत्म सम्मान को खोकर विनम्र बने रहना कायरता है । मानवता का सर्वोच्च गुण है - स्वाभिमान ! स्वाभिमान को छोड़कर कोई भी व्यक्ति श्रेष्ठ नहीं बन सकता, कहीं भी वह सफल नहीं हो सकता, किसी भी स्थान पर प्रतिष्ठा प्राप्त नहीं कर सकता।



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