एक सफल और युवा फिल्म सितारे सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। सोशल मीडिया, टीवी चैनल, वॉट्सएप विभिन्न अनुमानों से भरे पड़े हैं। तथ्य यह की हम नहीं जानते क्या हुआ । ऐसी स्थिती में किसी पर आरोप लगाना या अनुमान लगाना समझदारी नहीं है। हालांकि, इस घटना से बॉलीवुड की संस्कृति पर और मानसिक सेहत पर इसके असर को लेकर बहस शुरू हो गई है । यह समस्या ना सिर्फ बॉलीवुड में , बल्कि किसी भी अति - प्रतिस्पर्धी इंडस्ट्री में आ सकती हैं। मुझे इस शानदार लेकिन दोषपूर्ण इंडस्ट्री में दस साल से ज्यादा का अनुभव है। यहां मैं कुछ टिप्स दे रहा हूं कि अती - प्रतिस्पर्धी यानी होड़भरे माहौल का सामना कैसे करें:-
1. बॉलीवुड में कोई सीईओ नहीं है और हर कोई यहां बने रहने के लिए संघर्ष कर रहा है । कई लोगो को लगता है कि कोई बॉलीवुड कंपनी है। और इसमें काम करना यूनिलीवर में काम करने जैसा है । ऐसा नहीं है। यहां सिर्फ कुछ शक्तिशाली लोग है, जिनका कुछ समय के लिए बोलबाला रहता है। यह पूंजी और हुनर के साथ लाकर फिल्म प्रोजेक्ट तैयार करने की उनकी क्षमता से आता है। पिछली उपलब्धियों से ये प्रभाव बनाती हैं । लेकिन प्रभाव अस्थिर है । हिट इसे बड़ा देता हैं और फ्लॉप से यह गायब ही सकता है । बने रहने के लिए जीतते रहना जरूरी है ।
2. यह मूलतः असुरक्षित पेशा है । सितारे खो जाते हैं, निर्देशकों का जादू खत्म हो जाता है, अच्छी सूरत हमेशा नहीं रहती, दर्शकों की पसंद अस्थिर है, बहुत से लोग आप की जगह लेना चाहते हैं ।
3. असुरक्षा कम करने के लिए लोग गुट या कैंप बनाते हैं। अभिनेता, निर्देशक और निर्माता साथ आकर सुनिश्चित करते हैं कि उन्हें भविष्य में काम मिलता रहे। तथाकथित पार्टियां कैंप के मिलने का बहाना होती है। वहां भी असुरक्षा की भावना है। बस वहां थोड़ा सुरक्षित महसूस होता है । यह ऐसा है जैसे केंचुए गुच्चा बनाकर खुद को मजबूत दिखाते हैं । लोगों ने कैंप में रहकर या बाहर भी अच्छा काम किया है। यह उनकी अपनी मर्जी रही है ।
4. आप सफल है ( हिट देते है ) , तो इंडस्ट्री इतना प्यार व खुशामत करेगी कि जिसकी आप कल्पना नहीं कर सकते । असफल ( फ्लॉप देते है ) है, तो अछूत हो जाएंगे ।
5. सफलता का नशा इतना ज्यादा होता है कि लोग इसकी तुलना ड्रग्स से करते हैं । हालांकि फ्लॉप और अकेलेपन का दर्द भी इतना ही ज्यादा होता है ।
6. सफलता - असफलता के ये उतार - चढ़ाव मानसिक सेहत पर बुरा असर डालते हैं। हुनर ( अभिनय/ लेखन /निर्देशन ) के अलावा आपको बहुत सारी मानसिक ताकत की भी जरूरत है । सिक्स - पैक बॉडी के साथ सिक्स - पैक मन भी हो अगर आप पहले ही बीमार हैं या कोई मानसिक समस्या रह चुकी हैं तो यह खतरनाक कोकटेल बन सकता है ।
7. एक व्यक्ति के रूप में यह इस पर निर्भर करता है कि आप खुद को को कैसे देखते हैं। अगर खुद पर भरोसा है, तो आपको पार्टी में न्योतो या कुछ लोगों के लगातार कॉल्स की जरूरत नहीं है । यह भी अहसास होना चाहिए कि जीवन अन्यायपूर्ण है, लेकिन यह कभी आपके लिए अन्यायपूर्ण रूप से अच्छा हो सकता है, तो बुरा भी। बॉलीवुड के साथ भी ऐसा ही है । व्यक्ति को खुद में और अपने सफ़र में ही खुश है ना होता है, फिर वह कितना भी शानदार या साधारण हो ।
8. आप मानसिक रूप से कितने ही मजबूत क्यों ना हो, अगर बॉलीवुड के तालाब (इस पर आगे बात करूंगा) मैं पूरी तरह उतरते हैं तो आप जोखिम में है। यह काम में डूबे गैर - बॉलीवुड लोगों पर भी लागू होता है, जो अति - प्रतिस्पर्धी इंडस्ट्री में काम करते हैं। जीवन में विविधता लाना सीखे । आपको अपना काम पसंद होगा, लेकिन यह सुनिश्चित करें कि आपके जीवन में सिर्फ काम ही ना हो । स्वास्थ्य, परिवार, शौक, पुराने दोस्त, इन सब में शायद ग्लैमर और बॉलीवुड की खूबसूरती कम हो, हालांकि वे आपको सुकून और जिंदगी में खुशी दे सकते हैं ।
9. बॉलीवुड में कैसे रहा जाए, इसे लेकर मुझे सबसे अच्छी सलाह एअार रहमान से मिली थी , जिनसे मुझे मिलने का सौभाग्य मिला था। मैने उनसे कहा कि बॉलीवुड मुझे डरा रहा है, तो उन्होंने कहा , 'बॉलीवुड सुंदर तालाब जैसा है । हालांकि इसमें मगरमच्छ है । इसलिए एक कोने में खड़े होकर नहाना ठीक है। इसमें पूरी तरह तैरो मत । हमेशा एक पैर अंदर , एक पैर बाहर रखो।'
मैंने फिल्म इंडस्ट्री में रहने के लिए उस्ताद की सलाह को मंत्र की तरह माना । यह आसान नहीं है। बॉलीवुड की चमक तेज लग सकती है और आसुस के सामने सब तुच्छ । मानसिक सेहत के कारणों से ही मैंने तय किया कि मैं सभी अंडे एक टोकरी में ही मैं नहीं रखूंगा, चाहे टोकरी सबसे चमकदार हो । मैं दूसरे काम भी करता हूं ( इसलिए आप यह कॉलम पढ़ रहे हैं ) और मैं मगरमच्छों का शुक्रगुजार हूं कि वह मुझ तक नहीं पहुंचे । मैं होड़ वाले पेशो में काम कर रहे बाकी सभी को भी प्रोत्साहित करूंगा कि वह इसके कारण होने वाली मानसिक समस्याओं के प्रति जागरूक रहें। उन पर ध्यान दें और अपने जीवन में विविधता लाएं । कोई भी ग्लैमरस पार्टी या नौकरी में सफलता आपकी अंदरूनी खुशी से बढ़कर नहीं है ।
( ये लेखक के अपने विचार हैं।)
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