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Sunday, 26 July 2020

हवा तेज हो तो झुक जाने में कोई बुराई नहीं।( डॉ. उज्वल पाटनी )

डायनासोर लचीला नहीं था, इसलिए प्रकृति के बदलाव को झेल नहीं पाया । चींटी हर बदलाव में खुद को बचा ले गई।

आज मैं भेड़ चाल से परे कुछ ऐसे सिद्धांतों का जिक्र करने जा रहा हूं, जिनसे शायद आपकी सोचने की धारा बदल जाए। ये ऐसे सिद्धांत है जो सामान्य पुस्तकों में उपलब्ध नहीं है, बल्कि ने दुनिया के महान लोगों ने अलग-अलग इंटरव्यूज में शेयर किया है।


1. सोचिए, कुछ भी स्थाई नहीं है, तो राय भी बदल सकती हैं 

अक्सर देखने में आता है कि लोग जिद पर अड़े रहते हैं और राय बदलने को तैयार नहीं होते। कुछ लोग तो राय बदलने को बेहद बुरा भी मानते हैं कि व्यक्ति अपनी बात से पलट गया। जबकि ऐसा कई बार होता है कि बचपन में जिन चीजों से आप नफरत करते थे, बड़े होकर आप उनसे प्यार करने लग जाते हैं। आपकी किसी व्यक्ति के बारे में बहुत अच्छी या खराब राय थी, परंतु एक - दो घटनाओं के बाद आपकी राय बदल गई। अपनी राय और सोच को जकड़ कर अंगद के पैर की तरह मत रखिए कि कोई उसको हिला न सके। इससे आप का विकास रुक जाएगा। बदलाव को आने दीजिए। डायनासोर लचीला नहीं था, इसलिए प्रकृति के बदलाव को संभाल नहीं पाया। चींटी छोटी होते हुए भी हर बदलाव में खुद को बचा ले गई। जब हवा तेज हो तो झुक जाने में कोई बुराई नहीं है। जब हवा नहीं होगी तो फिर से तन कर खड़े हो जाइएगा।


2. सोचिए, यदि धन की होड़ ना होती तो कैसा जीवन जीते 

आप इस बात पर विचार कीजिए कि अगर आपको मनी गेम में आने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि आवश्यकता का धन आपके पास है, बल्कि थोड़ा अतिरिक्त भी है। यदि आपको भविष्य की चिंता ना करनी पड़े तो आप आनंद से भरा जीवन कैसा जीवन जिएंगे? आपकी दिनचर्या क्या होगी? आपका स्वभाव कैसा होगा? क्या आप उसका कुछ हिस्सा आज से ही जीना शुरु कर सकते हैं? सच तो यह है कि  बहुत से लोगों को वाकई धन की जरूरत नहीं है, वे पैसे की होड़ का हिस्सा भी नहीं बनना चाहते, लेकिन इसके बावजूद अब भी पारिवारिक व सामाजिक भेड़ चाल में वैसा ही जीवन जी रहे हैं, जैसे सालों से जीते हैं ।


3. सोचिए, यदि हम हर बहस में जीतने की कोशिश छोड़ दे तो

स्मार्ट लोगों की समस्या यह होती है कि वह हर बहस को जीतना चाहते हैं, लेकिन क्या ऐसा संभव है? कहीं जगह आपको आपसे बेहतर लोग मिलेंगे जो अपने क्षेत्र के माहिर होंगे और वे आपको क्षेत्र में हरा देंगे। बहस हारकर आप बेचैन हो जाएंगे, उस व्यक्ति के बारे में नकारात्मक महसूस करेंगे और उससे दूरी बनाने का प्रयास करेंगे। आप अपनी राय की रक्षा करने के लिए बहस करते हैं। यदि आप सिर्फ इतना समझ ले कि दूसरे के दूसरे के पास भी उसकी एक निजी राय है और आप दोनों अपनी-अपनी राय के लिए स्वतंत्र है तो फिर बहस की जरूरत ही नहीं रह जाएगी। याद रखिए हर पल जीतने की इच्छा को खत्म कर देना भी बहुत बड़ी जीत है। अब आप हर बहस को जीतने की लालसा को छोड़ दें और कुछ-कुछ को यूं ही गुजर जाने दे ।


4. सोचिए, यदि आप किसी का बातों से नहीं, सिर्फ एक्शन से मूल्यांकन करें 

कुछ लोग बातें करने में बहुत माहिर होते हैं। वे ऐसा जताते हैं मानो उन्हें दुनिया के बारे में सब कुछ पता है। वह खुद को परम ज्ञानी समझते हैं, लेकिन फिर भी जीवन में उनकी पत्नी सफलता हासिल नहीं कर पाते। इसके विपरीत कई लोग बहुत ओसत नजर आते हैं, औसत बातें करते हैं और इसके बावजूद अपने सपनों और लक्ष्यों को हासिल कर लेते हैं। ऐसे लोगों की सफलता को देखकर हमें आश्चर्य भी होता है। यह आश्चर्य इसलिए होता है क्योंकि हम केवल बातों से इंसान का मूल्यांकन करते हैं, जबकि मूल्यांकन एक्शन से होना चाहिए। कोई दिन रात - दिन सेहत की बातें करें, लेकिन अपनी सेहत का ध्यान न रखे तो उसे देखकर उसकी कथनी और करनी में फर्क करते आना आना चाहिए ।


5. सोचिए, आप आज भी स्टूडेंट है और लगातार सीख रहे हैं ।

आप ज्यादा बेहतर श्रोता बनेंगे, ज्यादा सवाल पूछेंगे और आपका दिमाग स्वीकारने के लिए तैयार होगा। यदि आप एक स्टूडेंट की जगह अपने को ज्ञानी या प्रोफेसर समझेंगे तो आपको हर क्षण स्वयं को सिद्ध करने के लिए मेहनत करनी पड़ेगी। और हर एक्शन के पहले असफलता के बारे में हजार बार सोचना होगा। हर कार्य के बारे में अनेक लोगों  को जवाब देना होगा। इसके विपरीत यदि आप खुद को सीखने वाला मानते रहेंगे तो आपको गलतियां करने की इजाजत भी होगी और उन गलतियों से आपको इतना गहरा दुख भी नहीं होगा। इसलिए महानतम लोग मृत्यु की अंतिम सांस तक अपने आप को अज्ञानी समझकर सीखते रहते हैं ।



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