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Thursday, 5 March 2020

शिक्षा में मानव मूल्य ( human values in education )


                  शिक्षा में मानव मूल्य
        human Values ​​in Education
वर्तमान परिस्थितियों में जो घटनाएं घट रही हैं वे बेहद चिंता का विषय है जिस युवा से देश भक्ति समाज के प्रति संवेदना ,इमानदारी का  जीवन जैसे सद्गुणों की अपेक्षा की जाती है उनका अभाव हो गया है देशभक्ति की भावना दिन प्रतिदिन कम होती कम होती जा रही है ऐसे समय में नैतिक मूल्य आधारित शिक्षा प्रदान करना और अधिक आवश्यक लगता है।



 आज शिक्षा के वर्तमान स्वरूप को परिवर्तित करने की आवश्यकता का अनुभव केवल भारत में ही नहीं संपूर्ण विश्व में किया जा रहा है। यह एक बहुत ही विकट समस्या है ।जब शिक्षा में से मानव मूल्य निकल जाते हैं तो बालक पशु समान रह जाता है यह मानव समाज के लिए हितकर नहीं होता अतः इस विषय पर गहनता से विचार करना आज की महती आवश्यकता है।


सबसे महत्वपूर्ण मूल्य एकाग्रता है ।

भारतीय मूल्यों को समझने के लिए तीन दृष्टि से विचार करना होगा ।
1 दार्शनिक चेतना।
2सामाजिक चेतना।
3 व्यक्तिगत चरित्र या आचरण।


शिक्षा द्वारा भौतिक एवं आध्यात्मिक प्रगति होनी चाहिए। आज की शिक्षा व्यक्ति को नौकर या बेरोजगार बनाती है शिक्षा से मानव जीवन निर्वाह और जीवन दृष्टि दोनों प्राप्त करता है। इसलिए शिक्षा का मूल्य आधारित होना परम आवश्यक है, हमारे देश में आज तक शिक्षा के लिए जितने भी आयोग गठित हुए सभी ने मूल्यों में मेहता को स्वीकार किया मानवीय मूल्यों एवं  भ्रातत्व की प्रबलता के कारण हमारा देश ''  वसुदेव कुटुंबकम " की धारणा में विश्वास रखता रहा है ।



हमारी प्राचीन शिक्षा व्यवस्था में विनम्रता ,यश ,आयु ,मूल्य आदि गुणों का समावेश था।हमारी समाज व्यवस्था में यह माना गया है कि मूल्य (संस्कारों) का प्रारंभ गर्भावस्था  से ही हो जाता है , हमारी शिक्षा व्यवस्था द्वारा आत्मनिर्भरता, चरित्र ,ईमानदारी ,आत्मानुशासन ,एकाग्रता, अधिकार व कर्तव्य के प्रति जागरूकता, त्याग की मनोवृत्ति ,समाज हित के लिए कार्य ,शांतिपूर्वक सहअस्तित्व, स्वदेशी भाव आदि गुणों का विकास होना चाहिए।
शिक्षा द्वारा हम आधुनिक तकनीक का प्रयोग कर समृद्ध बने। मनुष्य की अंतर्निहित शक्तियों क्षमताओं को पहचानते हुए उसकी वास्तविक शक्ति को उजागर करें।
शिक्षा द्वारा रोजगार, बेहतर भौतिक सुविधा युक्त जीवन, समय में साधनों का अच्छा प्रबंधन, कुशल कार्यशैली, आध्यात्मिक ज्ञान, सामाजिक जागरूकता, जीवन के उच्च आदर्श, जीवन में निपुणता, नैतिक मूल्य आदि का व्यक्तित्व में समावेश होना चाहिए।
                             यदि कोई राष्ट्र अपनी परंपरा को छोड़ देता है तो वह अपनी पहचान खो देता है।

  हमें तकनीकी शिक्षा में  1 पठनम 2 मनथनम3चिंतनम 4संकेतनम पद्धति को अपनाया जाना चाहिए।


                 हमें कहां पहुंचना है उस मंजिल के साथ-साथ  राष्ट्र के लक्ष्य का भी ज्ञान होना चाहिए, इसके लिए विद्यार्थी, अभिभावक, संस्थाएं  तथा सरकार सब को मिलकर एक टीम की तरह काम करना होगा। आशा के अनुरूप परिणाम प्राप्त करने के लिए हमें गुणवत्ता, उत्तरदायित्व, व्यावसायीकता के साथ-साथ नैतिकता पर भी बल देना पड़ेगा।
                         पूर्णतया अभय, मस्तिष्क की शुद्धता, आत्मानुभूति,दान, दम, ईश्वर की आराधना, तप, स्वाध्याय आदि के द्वारा एक शिक्षक समाज में  उच्च मानव मूल्यों की स्थापना कर सकता है।
अनैतिकता  पूर्वक जीवन जीने वाला व्यक्ति नैतिक शिक्षा नहीं दे सकता, केवल पाठ्यक्रम से नैतिक शिक्षा प्राप्त नहीं होती, इसके लिए आचरण  महत्वपूर्ण है, संस्कारित  होने के लिए आवश्यक है, बालक को सतत ऐसा परिवेश मिले जिससे उसका नैतिक विकास हो सके इसमें परिवार, विद्यालय, महाविद्यालय, शिक्षा तंत्र में समाज सभी की भूमिका है।

हर मनुष्य में अच्छाई होती हैं वह कैसे बाहर आए इस हेतु प्रयत्न होना चाहिए, अच्छे अनुभवों के आदान - प्रदान से व्यक्ति के जीवन में परिवर्तन आता है, प्लास्टिक में पानी की बोतल का उपयोग किस तरह पर्यावरण को खराब करता है। यह समझने पर स्वत: प्लास्टिक का उपयोग बंद हो जाता है मातृभाषा का देन दैन्नदिन जीवन में उपयोग सामाजिक प्रगति के लिए आवश्यक है मनुष्य की बुराइयों की चर्चा के स्थान पर अच्छाई की रेखा को निरंतर आगे बढ़ते
रहना चाहिए।

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