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Friday, 6 March 2020

शिक्षा में मानव मूल्य ( human values in education ) part- 2


शिक्षा में मानव मूल्यों की स्थापना आवश्यक है। विद्यार्थी शील, विनय,  साधना द्वारा अपने जीवन को समुन्नत बना सकता है । भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के आधार पर ही हम अपनी अपनी पहचान बनाए रख सकते हैं। परिवार की शिक्षा या कुटुंब प्रबोधन यह समय की आवश्यकता है।


शिक्षा वह है जो मुक्ति दे, प्रकाश दे,  विनय दें , तथा शिक्षा मनुष्य को परम तत्व का ज्ञान कराएं। भाषा, पुरुषार्थ, पोशाक, खानपान, व्यवहार यह सब संस्कार पैदा करते हैं। मनुष्य बहुत से संस्कार अपने परिवेश से सीखता है। शिक्षक अपने आचरण द्वारा शिक्षा संस्थानों में अच्छा परिवेश  उपलब्ध करा सकते हैं। हमे सामाजिक समरसता के भाव को अपनाना चाहिए ।
व्यक्ति के चरित्र निर्माण में व्यक्तित्व का विकास पंचकोश पर निर्भर है। अन्नमय कोश द्वारा शारीरिक विकास, प्राणमय द्वारा कोश द्वारा प्राणिक विकास, मनोमय कोश द्वारा मानसिक विकास, विज्ञानमय कोश द्वारा बौद्धिक विकास तथा आनंदमय कोष द्वारा आध्यात्मिक विकास होता है।


मनुष्य को संवेदनशील होना चाहिए । मानवीय संवेदनाएं मनुष्य में अच्छे संस्कारों का निर्माण करती है अच्छे परिवेश के कारण व्यक्ति धीरे-धीरे अपनी अच्छी बातों को अपनाता है उसका जीवन आदर्श बन जाता है।
सोशल मीडिया भी आज हमारे परिवेश को प्रभावित कर रहा है हम इसका उपयोग सावधानी व  समझदारी से करें। जिस प्रकार से पश्चिमी देशों की नकल पर आर्थिक विकास हो रहा है उससे हमारे पारिवारिक व सामाजिक जीवन पर भी प्रभाव पड़ा है।
इसकी शुरुआत हम स्वयं से करें । आपसे छोटा जब आपको नमस्कार करें तो आप विनम्रता पूर्वक नमस्कार कहे। हम जीवन में सब कुछ प्राप्त नहीं सकते जितना कर सकते पर जितना कर सकते है उतना तो करें।


मनुष्य के जीवन में बहुत ही अच्छा यह हैं। हम सकारात्मक चर्चा करें अच्छी बातों की शुरुआत स्वयं से प्रारंभ करे धीरे-धीरे हमारे साथ लोग जुड़ते चले जाएंगे इससे वांछित परिवर्तन आएगा ।
देश के सामने भ्रष्टाचार, महिलाओं पर अत्याचार, आतंकवाद आदी अनेक समस्याएं हैं।केवल समस्याओं पर चर्चा करने से परिणाम नहीं आने वाले हमें इनके उत्तर तलाशने होंगे देश को समस्याओं का समाधान देने वाले युवकों की आवश्यकता है। दुनिया में जिन देशों ने विकास क्या है यदि उनसे कुछ सीखना है तो अच्छे नागरिक के गुण, समय प्रबंधन, अनुशासन सीखे। यदि देश को बदलना है( देश को प्रगति करनी है) तो शिक्षा को बदलना होगा।
हम केवल मानव मूल्यों की चर्चा नहीं उनको जीवन व्यवहार में लाएं। कमियों से हताश होने की आवश्यकता नहीं है।  उत्साह व संकल्प के साथ अवसर का उपयोग करें। देश का वातावरण बदलने के लिए हमें प्रतिमान खड़े करने करने पड़ेंगे । अंधेरा भागो, कहने से अंधेरा नहीं भागता अंधेरा दूर होता है दीप जलाने से।

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