स्वामी विवेकानंद जी द्वारा बताया गया सफलता का तीसरा सूत्र : -
सबके जीवन के लिए एक सबक है कि संकट का सामना करो, वीरता से सामना करो। कायर कभी भी विजय हासिल नहीं कर सकता। हमें डर और कष्टों का सामना करना होगा, उसके स्वत: दूर चले जाने की आशा छोड़कर।"
यही है जीवन की सफलता का अचूक सूत्र - "कष्टों कठिनाइयों से डरकर भागो मत डटकर सामना करो तभी विजय मिलेगी"। जीवन है तो संघर्ष है। संघर्षों के बिना जीवन ही निरर्थक है। इसलिए जीवन में आगे बढ़ना है, लक्ष्य को प्राप्त करना है, तो मार्ग में आने वाली अनेकानेक बाधाओं, समस्याओं से डर कर भागना नहीं है, उनका वीरता के साथ मुकाबला करना है।
जब भी हम साहस के बारे में सोचते हैं तो सबसे पहले स्वामी विवेकानंद जी हमारे सम्मुख होते हैं। स्वामी विवेकानंद वीरता की प्रतिमूर्ति है। उनका जीवन हमें सिखाता है कि वीरता क्या होती हैं? उनके जीवन के प्रत्येक घटना साहस और निडरता से परिपूर्ण है । कायरता क्या होती है , वे नहीं जानते थे । साहस उनका जन्मजात गुण था, जो उनके प्रत्येक क्रियाकलाप में स्पष्ट झलकता था और उसके निकट रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को प्रभावित करता था। आज भी उनका यह संदेश दिग्भ्रमित युवा पीढ़ी में नई चेतना का संचार कर सकता है। जिन लोगों में आत्म बल की कमी होती है, वही समस्याओं से दूर भागते हैं। स्वामी विवेकानंद का यह सूत्र समस्याओं से सामना करने की नई शक्ति देगा। हमारी क्षमता को प्रबल कर हमारे भीतर मानसिक शक्ति और आत्मविश्वास को भर देगा । इसलिए सदैव स्मरण रखें - "भागों में, सामना करो"।
सबके जीवन के लिए एक सबक है कि संकट का सामना करो, वीरता से सामना करो। कायर कभी भी विजय हासिल नहीं कर सकता। हमें डर और कष्टों का सामना करना होगा, उसके स्वत: दूर चले जाने की आशा छोड़कर।"
यही है जीवन की सफलता का अचूक सूत्र - "कष्टों कठिनाइयों से डरकर भागो मत डटकर सामना करो तभी विजय मिलेगी"। जीवन है तो संघर्ष है। संघर्षों के बिना जीवन ही निरर्थक है। इसलिए जीवन में आगे बढ़ना है, लक्ष्य को प्राप्त करना है, तो मार्ग में आने वाली अनेकानेक बाधाओं, समस्याओं से डर कर भागना नहीं है, उनका वीरता के साथ मुकाबला करना है।
जब भी हम साहस के बारे में सोचते हैं तो सबसे पहले स्वामी विवेकानंद जी हमारे सम्मुख होते हैं। स्वामी विवेकानंद वीरता की प्रतिमूर्ति है। उनका जीवन हमें सिखाता है कि वीरता क्या होती हैं? उनके जीवन के प्रत्येक घटना साहस और निडरता से परिपूर्ण है । कायरता क्या होती है , वे नहीं जानते थे । साहस उनका जन्मजात गुण था, जो उनके प्रत्येक क्रियाकलाप में स्पष्ट झलकता था और उसके निकट रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को प्रभावित करता था। आज भी उनका यह संदेश दिग्भ्रमित युवा पीढ़ी में नई चेतना का संचार कर सकता है। जिन लोगों में आत्म बल की कमी होती है, वही समस्याओं से दूर भागते हैं। स्वामी विवेकानंद का यह सूत्र समस्याओं से सामना करने की नई शक्ति देगा। हमारी क्षमता को प्रबल कर हमारे भीतर मानसिक शक्ति और आत्मविश्वास को भर देगा । इसलिए सदैव स्मरण रखें - "भागों में, सामना करो"।

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