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Tuesday, 10 March 2020

पूर्ण एकाग्रता से लक्ष्य साधो ,, Aim with full concentration

स्वामी विवेकानंद जी द्वारा लिखा गया सफलता का छोटा सूत्र।


जो भी कार्य हमारे सामने है, उसको पूरा करने के लिए एकाग्र मन से जुट जाना है। यदि हमने एकाग्र होकर परिश्रम का निशाना लगाया, तो वे निश्चित ही लक्ष्य की मंजिल पर लगेगा, किंतु यदि हमारा ध्यान भटक गया भ्रमित हो गया तो फिर मंजिल तक पहुंचना असंभव हो जाएगा।

भगवत गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं- "कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन"। हे अर्जुन,  तुम्हें केवल कर्म का अधिकार है , उसके फल की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।"  यह केवल तभी संभव है जब मन मस्तिष्क को शांत रखकर संपूर्ण ऊर्जा को एकत्र करते हुए पूर्ण एकाग्रता से कार्य करें। न तो कर्म फल की चिंता हो,  नहीं कार्य की असफलता का डर और ना ही लक्ष्य के प्रति किसी प्रकार का भ्रम। तभी सफलता को प्राप्त कर पाना संभव हो सकेगा।
लक्षित कार्य तभी होगा जब मस्तिष्क शांत हो और सारी उर्जा केवल कार्य को पूरा करने में एकत्र हो। यदि तुम विश्व के प्रमुख महान व्यक्तियों की जीवनी पढ़ो तो तुम्हें ज्ञात होगा कि वह सब आश्चर्यजनक रूप से शांत प्रकृति के व्यक्ति थे। कहीं भी कुछ भी उन्हें असंतुलित नहीं कर पाता था।

इससे यह स्पष्ट होता है कि लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निर्धारित कार्य की सफलता के लिए आवश्यक एकाग्रता बनी रहे, इसके लिए यह भी आवश्यक है कि वहां तनाव, चिंता जैसी भावनात्मक बाधाएं  पास न आने पाएं।
पूर्ण एकाग्रता ही वह एकमात्र चाबी है जिससे जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफलता का मार्ग खुल सकता है। स्वामी विवेकानंद का संदेश हमें यही प्रेरणा प्रेरणा देता है - पूर्ण एकाग्रता से लक्ष्य को साधो ।

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